भावनाओं को अपने अन्दर
क़ैद करके मत रखो
बाहर निकालो
लेकिन
ज़ोर से हसना मत
बिलबिला कर रोना नहीं ग़ुस्से से दहाड़ने मत लगना
दर्द में तड़पने न लग जाना
हाँ!!! लेकिन अपनी
भावनाएँ ज़रूर
बिना किसी झिझक के
अभिव्यक्ति ज़रूर करना
ऐसा कह कर मुझे
कब तक बेवक़ूफ़ बनाओगे?
मुझे बनाओ तो ठीक
लेकिन मैं बनाऊँ
तो ग़लत क्यूँ कहते हो?
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