Sunday, 18 June 2017

Out of love - 82!

Love isn't meant to do any good to you, it just builds a crack in you where all the light can enter, they usually call that crack a heartbreak
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Our battles are more of giving in more than giving up.
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The only serious problem is that we don't take our serious problems seriously!
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We fuck up more than a lot of times, but let's not live in the delusion that it is all okay and normal. There is no pride or glory in screwing things up. It is shit. And shit can never be a perfume even if it is normal af! You fuck up, you suffer; that is it.
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Let the pain consume you;
Maybe that is the only way
You will realise how important
It is to not underestimate the same.

Rest assured, you'll emit all the gold and light in the end!y
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Write your autobiography and categorize it as fiction, because looking back is just as unreal as it gets!
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A shot in the heart kills
A shot through the heart doesn't let you die while killing you every moment
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If you don't consume pain, then how will you bleed art?
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It's okay if you think my dreams are unreal, I've spent a major part of time believing the same too!
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It's the lust for victory that has killed the humanity inside out!

किससे, कहानी और तुम!

ये जो कहानियाँ पढ़ कर तुम सब अपना दिल बहला लेते हो, उन कहानियों के पीछे छुपे क़िस्से को जानने का मन नहीं करता? ये जो तुम हर चीज़ को कह देते हो की ये सिर्फ़ कहानी उसके पीछे छुपी सचाई को देखने से डर लगता है क्या? हर कहानी क़िस्सों से बनती है, और क़िस्से बनते हैं ज़िंदगी के हर उस पल से जो इस बात का इल्म कर देके ये ज़िंदगी है और इसको जीना है. हाँ, यहाँ बहुत लोग हैं. इतने लोग की तुम शायद खो जाओ इनके. लेकिन कभी सोचा है इन सबके क़िस्से कहानी क्यूँ नहीं बन पाते? ये जो नहीं सोचने वाली सोच है ना, यही है जो हमें खा रही है. तुम्हें भी और मुझे भी. इससे पहले की यह हमे खा जाए अपना क़िस्सा किसी अपने को ज़रूर सुना देना, क्या पता उसे एक कहानी और तुम्हें एक दोस्त मिल जाए.

वैसे तो ऐसा कोई मिलेगा या नहीं यह कहना मुश्किल है लेकिन अगर तुम चाहो तो दीवारों को भी अपनी कहानी सुना सकते हो, वो क्या है ना दीवारों के कान होते हैं; और इंसानो की तरह ना दिल होता है ना दिमाग़. मैं भी आजकल अपनी दीवार को अपनी कहानी सुना रही हूँ और वो रोज़ बिना कुछ कहे सुन लेती है. सहारा भी दे देती है और छोड़ कर चले जाने वाली धमकी भी नहीं देती.

लेकिन तुम ऐसा मत करना, ख़ैर तुम्हारे पास तो लोग भी बहुत हैं इसलिए शायद मेरे लिए तुम 2 मिनट तक नहीं निकाल पाते, ख़ैर कोई बात नहीं कोई काम होगा; या फिर मुझसे ना बात करने वाला काम भी तो काम ही है तुम्हारे लिए वो ही काम शायद कर रहे होगे. कोई बात नहीं. अब मुझे आदत पड़ गयी है. लेकिन तुम्हें ऐसी आदत ना पड़े इसका मैं हमेशा पूरा ख़याल रखूँगी. लिखना तो नहीं चाहती लेकिन फिर भी लिख देती हूँ क्यूँकि वैसे भी रोज़ मन मारती ही हूँ तो आज एक और बार सही.

तुम बस अपना क़िस्सा सुनाते रहना हम भी सुनते रहेंगे, हमेशा.
                                         

Tuesday, 13 June 2017

It is not that bad, after all!

If you think hope
Keeps you intact
You aren't totally wrong
Because believe it or not
Our delusions and illusions
Have always been
As important as what
They call facts and science.

They won't let you
Believe in magic
Because that will
Fail their lust for
Logic and science
But, rest assured the
Components of your
Very own unheard
Dreams are as real.
This uncontrollable lust
For science and logic
Makes wars and times
Oh so tragic
Yet, they drool
All over that filth.

Don't be filthy
Don't be jealous
For an eye for
An makes the world blind.

Believe in love
And in peace
It's all real
Till you believe.

Don't spit the venom
Help people clean it
What's within
And around
For some have to give
For others to feel
The bliss of taking
The beauty that surrounds.


Thursday, 1 June 2017

कुछ अल्फ़ाज़ बस यूँही - 17!

इतनी समझ कभी ना आये, की मोहब्बत और भरोसा करने से पहले आँख खोलनी पड़े.
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वक़्त आने पर अपनों का पता चले या ना चले, परायों का पता तो चल ही जाता है.
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तेरी हर ख़्वाहिश का ख़याल रखती हूँ
बस यूँही बेवजह
अपने हर ख़्वाब को भुला देती हूँ
बस यूँही बेवजह
तेरी हर मुस्कान की इबादत करती हूँ
बस यूँही बेवजह.

शायद इस बेवजह की
वजह से हूँ मैं आज
बस यूँही बेवजह.
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हालत का इल्म नहीं, और चले हैं हाल समझने.
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तो आज फिर, रात का अँधेरा और चाँद की रोशनी ही सुनेंगे मेरे किसे. वो जनाब बात कुछ यूँ है की लोग कहानियाँ पसंद करते हैं पर मेरे पास कहानी नहीं क़िस्से हैं. तो मैं इस अंधेरे में दुबकी हुई तन्हाई को ही सुना देती हूँ अपना किसा क्या पता ये तन्हाई ही इस क़िस्से में कोई कहानी ढूँढ़ ले.
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किसी ने कभी कहा नहीं था की सुकून आपके दर आएगा, अब आप ख़ुद ही ऐसे ख़्वाब देखें और ज़माने को दोष दें तो यह आपकी बेवक़ूफ़ी है.
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क्यूँकि ये प्यार सिर्फ़ मेरा है, और हमारा नहीं इसलिए इस प्यार का सारा दर्द मेरा और हर ख़ूबसूरत अहसास तुम्हारा. तुम्हारी ख़ुशी के लिए आज भी और हमेशा कुछ भी.
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ये ज़ख़्म भर जाएगा
इस ज़ख़्म का दर्द भी
हार मान जाएगा
पर इस ज़ख़्म का
एहसास एक दिन
किसी मंज़िल पर
पहुँचा कर ही मानेगा
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तुम हमारी दाद दो या ना दो, हमारी शिद्दत की दाद तो देनी ही पड़ेगी. आसान थोड़ी है तुम्हारे जवाब ना देने के बाद भी हर रोज़ उम्मीद करना की तुम्हें हो ना हो हमारी फ़िक्र ना सही परवा तो है.
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अब मुझे मरहम का नहीं, उस ज़ख़्म का इन्तज़ार है जिसका मरहम मेरे पास है.
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