Thursday, 21 July 2016

ना जाने ऐसा क्या हुआ!

ना जाने मुझसे ऐसा
क्या हो गया
की मेरा मानो सब कुछ ही
खो गया

ना नींद आती है ना चैन,
बस दिन रात उस गलती को
समझने की कोशिश करती हूँ
जो मैंने शायद की ही नहीं है

तुम को शायद खो दिया है मैंने
या फिर शायद कभी पाया ही नहीं था
पर वो जो पल साथ बिताये थे
शायद उन्हीं ने ज़िन्दगी का मतलब सिखाया था

चलो, खैर अब तो
" गुज़र गयी गुजरान
क्या झोपडी क्या मकान "
वाली बात है

तुम जहाँ भी हो खुश रहो
मैं तुम्हारी यादों के साथ
अपनी तन्हाई को मिटा लूंगी
मैं भी सांसें तो आखिर ले ही लूंगी 

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