Saturday, 30 July 2016

कभी बताया नहीं आपको!

कभी बताया नहीं आपको
की आपकी कितनी याद आती है
ये बात शायद
सिर्फ,
अँधेरी रातों
मे चमकते हुए
चंद तारों को ही
पता है

और वैसे भी
अब आप दीखते कहाँ है
जो कोई बात आपसे करी जाए
आप तो खुश होंगे
उस दुनिया में भी

हर हाल में
मुस्कुराने की वजह
ढूँढना तो आपकी
काफी पुरानी आदत है
अब तक तो काफी खुशियाँ
ढूँढ ही ली होगी आपने

मुझे याद पता नहीं
करते हैं या नहीं आप
पर मेरा गीला तकिया
इस बात का गवाह है की
मुझे आपकी कमी से ज्यादा
शायद ही कोई और चीज़
है जो इस वक़्त खल रही हो

आज जब इतनी बैचैनी
हो रही है
सब कुछ फिसलता हुआ
नज़र आ रहा है
तब कोई एक भी
ऐसा नहीं है
जो मुझे गले से
लगा कर शांत करा सके

अगर जाना ही था
तो तनहा रहने की
आदत ही डलवा जाते
क्यूँ लगवाई अपनी आदत
जब साथ निभाना ही नहीं था? 

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