Tuesday, 26 July 2016

अब मुझे इंतज़ार नहीं है!

अब मुझे इंतज़ार नहीं है
क्यूँकि इंतज़ार वहाँ होता है
जहाँ उम्मीद हो
और अब उम्मीदों को
मुह मोड़े काफ़ी मुद्दत
हो गयी है।

मायूस नहीं हूँ
और अगर हूँ भी
तो ठीक हो जाऊँगी,
नहीं भी हुई
तो क्या फ़र्क पड़ेगा
वक्त तो ना
तब रुका था
ना अब रुकेगा।

ज़िदगी हो या जंग
लड़ना और बढ़ना
तो पड़ता ही है
कभी मर्ज़ी से
और कभी
मजबूरी से।

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