Saturday, 9 July 2016

मुझे एक बात समझ नहीं आती!

मुझे एक बात
समझ नहीं आती
मैं तेरी खुशी
के अलावा कोई
और दुआ
आखिर क्यूँ
नहीं मांग पाती?

खुश तो मैं
भी नहीं हूँ
और
खुश तू भी
नहीं है
पर तेरी खुशी से
मेरा क्या वास्ता
जब मिलता ही नहीं
हमारा बनाया हुआ रास्ता?

जब भी मेरे हाथ
कुछ मांगने को उठते
तेरा ही नाम मेरे
लबों पे आता।

लगता है कुछ हो गया है
दिल दिमाग और लबों
के बीच में कुछ
अजीब सा फ़ासला जो
हो गया है,
वैसा ही जैसा,
अब
मेरे और तेरे बीच है।

बस फ़रक इतना है
कि ये फ़ासले
बनाए ना थे मैंने
अनजाने में शायद
बन गये ये तुमसे।

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